भारत, शिर्फ़ एक राष्ट्र रूपी भौगोलिक सीमा नहीं है बल्कि उससे कहीं अधिक, यहाँ के मूल निवासियों के लिए एक भावनात्मक और संवेदी अंग है जो उनको एक प्रकार की ऊर्जा प्रदान करने का कार्य करता है| आपने बहुत से सफल लोगों की आत्मकथा में सुना होगा क्यों वे भारत से स्वयं को अलग नहीं कर पाए और बहुत से ऐसे लोग जो इस देश को छोड़ कर दूसरे देशों में बस गए साथ ही वहां सफलता के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हैं| इन सब का अर्थ यह कतई नहीं कि हर भारतीय इन २ श्रेणियों में आता हो यहाँ आज भी एक वर्ग ऐसा है जिसके लिए एक वक्त का भोजन जुटा पाना ही बड़ी सफलता के रूप में निरुपित होता है| आज़ादी के लगभग ७५ वर्षों के उपरांत भी हम आर्थिक आज़ादी, सामाजिक सुरक्षा, सामजिक सौहार्द जैसी परिस्थियों को प्राप्त करने से कोसों दूर हैं|
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