मनुष्य स्वयं को ज्ञात ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ प्राणी इसलिए नहीं मानता कि वह वसुंधरा पर आश्रित समस्त प्राणियों पर नियंत्रण करता है या स्वयं के जीवन को सुखमय बनाने हेतु नाना प्रकार के आविष्कारों को जन्म देता है बल्कि मनुष्य इस पृथ्वी का श्रेष्ठ प्राणी इसलिए माना जाता है क्योंकि वह बुद्धि/ विवेक व ज्ञान में श्रेष्ठ है। यही कारण है कि मनुष्य ने अपनी कल्पनाशक्ति के बल से संसार में समय - समय पर अनेक अविष्कार किए हैं। जिनमे कुछ सर्वाधिक महत्वपूर्ण अविष्कार मानव जाति के प्रचलित हैं जैसे आग की खोज, पहिए की खोज, बिजली की खोज, सूचना क्रांति का आगमन एवं भविष्य में होने वाला सर्वाधिक महत्वपूर्ण आविष्कार कृत्रिम बुद्धिमत्ता जो मनुष्य के जीवन को एक नए आयाम तक ले जायेगा।।
Friday, 9 September 2022
Thursday, 8 September 2022
संघर्ष!
शायद संघर्ष "शब्द" का उपयोग सर्वप्रथम सत्ता को हथियाने हेतु कुलीन लोगों या राजतंत्र में उच्च पदस्थ लोगों द्वारा किया जाता था जिसके अंतर्गत वर्षों तक सत्ता का संघर्ष चलता रहता था इस संघर्ष की पराकाष्ठा वंश के विनाश तक जाती थी। और जब तक एक वंश या परिवार का संपूर्ण विनाश न हो जाए तब तक शायद यह संघर्ष चलता रहता था। किंतु आज के समय में संघर्ष "शब्द" का दुरुपयोग उच्च पदस्थ लोगों द्वारा अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु इस प्रकार किया गया जैसे "संघर्ष" संघर्ष नहीं बल्कि एक दैनिक परिश्रम हो अर्थात जीवन निर्वाह हेतु कर्म, दिन के भोजन प्राप्ति हेतु कर्म, स्वस्थ शरीर बनाए रखने हेतु कर्म, कोई राजकीय या शशकीय सेवा प्राप्ति हेतु कर्म, अच्छी शिक्षा प्राप्ति हेतु कर्म इत्यादि को "संघर्ष" उच्चारित किया गया ताकि इस जगत का 90 फीसदी मनुष्य उक्त कर्मो को भाग्य मानकर संघर्ष करता रहे और 1 फीसदी सत्तासीन दुर्दांत/वहशी/हत्यारों को कुत्सित सत्ता से बेदखल करने या व्यवस्था परिवर्तन की बात न कर सके।।
Saturday, 6 August 2022
The Truth (सत्य)
भारत, शिर्फ़ एक राष्ट्र रूपी भौगोलिक सीमा नहीं है बल्कि उससे कहीं अधिक, यहाँ के मूल निवासियों के लिए एक भावनात्मक और संवेदी अंग है जो उनको एक प्रकार की ऊर्जा प्रदान करने का कार्य करता है| आपने बहुत से सफल लोगों की आत्मकथा में सुना होगा क्यों वे भारत से स्वयं को अलग नहीं कर पाए और बहुत से ऐसे लोग जो इस देश को छोड़ कर दूसरे देशों में बस गए साथ ही वहां सफलता के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हैं| इन सब का अर्थ यह कतई नहीं कि हर भारतीय इन २ श्रेणियों में आता हो यहाँ आज भी एक वर्ग ऐसा है जिसके लिए एक वक्त का भोजन जुटा पाना ही बड़ी सफलता के रूप में निरुपित होता है| आज़ादी के लगभग ७५ वर्षों के उपरांत भी हम आर्थिक आज़ादी, सामाजिक सुरक्षा, सामजिक सौहार्द जैसी परिस्थियों को प्राप्त करने से कोसों दूर हैं|