शायद संघर्ष "शब्द" का उपयोग सर्वप्रथम सत्ता को हथियाने हेतु कुलीन लोगों या राजतंत्र में उच्च पदस्थ लोगों द्वारा किया जाता था जिसके अंतर्गत वर्षों तक सत्ता का संघर्ष चलता रहता था इस संघर्ष की पराकाष्ठा वंश के विनाश तक जाती थी। और जब तक एक वंश या परिवार का संपूर्ण विनाश न हो जाए तब तक शायद यह संघर्ष चलता रहता था। किंतु आज के समय में संघर्ष "शब्द" का दुरुपयोग उच्च पदस्थ लोगों द्वारा अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु इस प्रकार किया गया जैसे "संघर्ष" संघर्ष नहीं बल्कि एक दैनिक परिश्रम हो अर्थात जीवन निर्वाह हेतु कर्म, दिन के भोजन प्राप्ति हेतु कर्म, स्वस्थ शरीर बनाए रखने हेतु कर्म, कोई राजकीय या शशकीय सेवा प्राप्ति हेतु कर्म, अच्छी शिक्षा प्राप्ति हेतु कर्म इत्यादि को "संघर्ष" उच्चारित किया गया ताकि इस जगत का 90 फीसदी मनुष्य उक्त कर्मो को भाग्य मानकर संघर्ष करता रहे और 1 फीसदी सत्तासीन दुर्दांत/वहशी/हत्यारों को कुत्सित सत्ता से बेदखल करने या व्यवस्था परिवर्तन की बात न कर सके।।
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